अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिसुपन तेम परिहरेउँ न संगू। कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबचपनसे ही मैंने उनका साथ नहीं छोड़ा और उन्होंने भी मेरे मनको कभी नहीं तोड़ा (मेरे मनके प्रतिकूल कोई काम नहीं किया)। मैंने प्रभुकी कृपाकी रीतिको हृदयमें भलीभाँति देखा (अनुभव किया है)। मेरे हारनेपर भी खेलमें प्रभु मुझे जिता देते रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 561 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सिसुपन तेम परिहरेउँ न संगू। कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगू।।
मैं प्रभु कृपा रीति जियँ जोही। हारेहुँ खेल जितावहिं मोही।।
स्रोत अभिलेख 2.26 · पुस्तक पृ. 560, 561
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सिसुपन तेम परिहरेउँ न संगू। कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगू।।
English explanation
Since childhood I have never left his company; he has never hurt my feelings. ‘तेम’ is interpreted provisionally as a possible source typo.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिसुपन | बचपन | childhood |
| तेम | से | since |
| परिहरेउँ | मैंने छोड़ा | I abandoned |
| न | नहीं | not |
| संगू | साथ; संगति | company; companionship |
| कबहुँ | कभी | ever |
| न | नहीं | not |
| कीन्ह | किया | caused |
| मोर | मेरा | my |
| मन | मन | heart; feelings |
| भंगू | भंग; दुख | hurt; disappointment |
2 मैं प्रभु कृपा रीति जियँ जोही। हारेहुँ खेल जितावहिं मोही।।
English explanation
I have observed in my heart the way my lord shows kindness: even when I lose at play, he lets me win.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैंने | I |
| प्रभु | स्वामी राम की | of my lord Rama |
| कृपा | कृपा | kindness; grace |
| रीति | रीति; ढंग | way; manner |
| जियँ | हृदय में | in my heart |
| जोही | देखी; परखी | observed; discerned |
| हारेहुँ | मेरे हारने पर भी | even when I lose |
| खेल | खेल में | at play |
| जितावहिं | जिताते हैं | let win; make victorious |
| मोही | मुझे | me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 561
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 560, 561
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।