अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिर भर जाउँ उचित अस मोरा। सब तें सेवक धरमु कठोरा।।
मूल पाठ
सिर भर जाउँ उचित अस मोरा। सब तें सेवक धरमु कठोरा।।
देखि भरत गति सुनि मृदु बानी। सब सेवक गन गरहिं गलानी।।
स्रोत अभिलेख 2.203 · पुस्तक पृ. 512, 512
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुझे उचित तो ऐसा है कि मैं सिरके बल चलकर जाऊँ। सेवकका धर्म सबसे कठिन होता है। भरतजीकी दशा देखकर और कोमल वाणी सुनकर सब सेवकगण ग्लानिके मारे गले जा रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 512 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सिर भर जाउँ उचित अस मोरा। सब तें सेवक धरमु कठोरा।।
English explanation
‘It would be fitting for me to travel on my head. A servant’s duty is the hardest of all.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिर | सिर के | my head |
| भर | बल | supported on |
| जाउँ | मैं जाऊँ | I should go |
| उचित | उचित | fitting |
| अस | ऐसा | thus |
| मोरा | मेरे लिए | for me |
| सब | सब | all |
| तें | से | than |
| सेवक | सेवक का | a servant’s |
| धरमु | धर्म; कर्तव्य | duty |
| कठोरा | कठिन | difficult |
2 देखि भरत गति सुनि मृदु बानी। सब सेवक गन गरहिं गलानी।।
English explanation
Seeing Bharata’s condition and hearing his gentle words, all the attendants melt with sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| गति | दशा; आचरण | condition and conduct |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | words |
| सब | सभी | all |
| सेवक | सेवक | attendants |
| गन | समूह | the company of |
| गरहिं | द्रवित होते हैं | melt |
| गलानी | दुःख से | with sorrow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.203
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 512
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 512, 512
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