अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहिं सुसेवक बारहिं बारा। होइअ नाथ अस्व असवारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउत्तम सेवक बार-बार कहते हैं कि हे नाथ! आप घोड़ेपर सवार हो लीजिये। [भरतजी जवाब देते हैं कि] श्रीरामचन्द्रजी तो पैदल ही गये और हमारे लिये रथ, हाथी और घोड़े बनाये गये हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 512 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहहिं सुसेवक बारहिं बारा। होइअ नाथ अस्व असवारा।।
रामु पयोदेहि पायँ सिधाए। हम कहँ रथ गज बाजि बनाए।।
स्रोत अभिलेख 2.203 · पुस्तक पृ. 512, 512
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहहिं सुसेवक बारहिं बारा। होइअ नाथ अस्व असवारा।।
English explanation
The devoted attendants repeatedly say, ‘Master, please mount a horse.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | say |
| सुसेवक | अच्छे, निष्ठावान सेवक | devoted attendants |
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बारा | बार | time after time |
| होइअ | हो जाइए | please become |
| नाथ | हे स्वामी | O master |
| अस्व | घोड़े पर | on a horse |
| असवारा | सवार | mounted |
2 रामु पयोदेहि पायँ सिधाए। हम कहँ रथ गज बाजि बनाए।।
English explanation
Bharata says, ‘Rama went away on foot, yet chariots, elephants, and horses have been readied for me!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| पयोदेहि | पैदल | on foot |
| पायँ | पाँवों से | on his feet |
| सिधाए | चले गए | went away |
| हम | मेरे | me |
| कहँ | लिए | for |
| रथ | रथ | chariots |
| गज | हाथी | elephants |
| बाजि | घोड़े | horses |
| बनाए | तैयार किए गए | have been readied |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.203
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 512
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 512, 512
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।