अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आपु सुरसरिहि कीन्ह प्रनामू। सुमिरे लखन सहित सिय रामू।।
मूल पाठ
आपु सुरसरिहि कीन्ह प्रनामू। सुमिरे लखन सहित सिय रामू।।
गवने भरत पयोदेहिं पाए। कोतल संग जाहिं डोरिआए।।
स्रोत अभिलेख 2.203 · पुस्तक पृ. 512, 512
भावार्थ
मूल पाठ के बादतदनन्तर आप (भरतजी) ने गङ्गाजीको प्रणाम किया और लक्ष्मणसहित श्रीसीतारामजीका स्मरण किया। भरतजी पैदल ही चले। उनके साथ कोतल (बिना सवारके) घोड़े बागडोरसे बँधे हुए चले जा रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 512 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आपु सुरसरिहि कीन्ह प्रनामू। सुमिरे लखन सहित सिय रामू।।
English explanation
Bharata himself bowed to the Ganges and remembered Sita and Rama together with Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपु | स्वयं | himself |
| सुरसरिहि | गंगा को | to the Ganges |
| कीन्ह | किया | made |
| प्रनामू | प्रणाम | a reverential bow |
| सुमिरे | स्मरण किया | remembered |
| लखन | लक्ष्मण के | Lakshmana |
| सहित | साथ | together with |
| सिय | सीता को | Sita |
| रामू | राम को | Rama |
2 गवने भरत पयोदेहिं पाए। कोतल संग जाहिं डोरिआए।।
English explanation
Bharata set out on foot; riding horses were led alongside him by their reins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गवने | चल पड़े | set out |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| पयोदेहिं | पैदल | on foot |
| पाए | पाँवों से | on his feet |
| कोतल | सवारी के घोड़े | riding horses |
| संग | साथ | alongside |
| जाहिं | जा रहे हैं | are going |
| डोरिआए | लगाम से पकड़कर ले जाए हुए | being led by their reins |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.203
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 512
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 512, 512
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।