अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिय मनु राम चरन अनुरागा। घरु न सुगमु बनु बिषमु न लागा।।
मूल पाठ
सिय मनु राम चरन अनुरागा। घरु न सुगमु बनु बिषमु न लागा।।
औरउ सबहिं सीय समुझाई। कहि कहि बिपिन बिपति अधिकाई।।
स्रोत अभिलेख 2.78 · पुस्तक पृ. 408, 408
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरन्तु सीताजीका मन श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंमें अनुरक्त था। इसलिये उन्हें घर अच्छा नहीं लगा और न वन भयानक लगा। फिर और सब लोगोंने भी वनमें विपत्तियोंकी अधिकता बता-बताकर सीताजीको समझाया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 408 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सिय मनु राम चरन अनुरागा। घरु न सुगमु बनु बिषमु न लागा।।
English explanation
Sita’s heart was devoted to Rama’s feet; home did not seem easy to her, nor did the forest seem difficult.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिय | सीता का | Sita’s |
| मनु | मन | heart; mind |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| अनुरागा | प्रेम में लगा था | was lovingly devoted |
| घरु | घर | home |
| न | नहीं | not |
| सुगमु | सुगम; सहज | easy; comfortable |
| बनु | वन | the forest |
| बिषमु | कठिन | difficult |
| न | नहीं | not |
| लागा | लगा | seemed |
2 औरउ सबहिं सीय समुझाई। कहि कहि बिपिन बिपति अधिकाई।।
English explanation
Everyone else also tried to persuade Sita, repeatedly describing the many calamities of the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| औरउ | दूसरों ने भी | others too |
| सबहिं | सबने | all of them |
| सीय | सीता को | Sita |
| समुझाई | समझाया | advised; tried to persuade |
| कहि | कहकर | telling |
| कहि | बार-बार कहकर | telling repeatedly |
| बिपिन | वन की | of the forest |
| बिपति | विपत्तियों की | calamities |
| अधिकाई | अधिकता | abundance; great extent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 408
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 408, 408
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।