अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब नृप सीय लाइ उर लीन्ही। अति हित बहुत भाँति सिख दीन्ही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब राजाने सीताजीको हृदयसे लगा लिया और बड़े प्रेमसे बहुत प्रकारकी शिक्षा दी। वनके दु:सह दु:ख कहकर सुनाये। फिर सास, ससुर तथा पिताके [पास रहनेके] सुखोंको समझाया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 408 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब नृप सीय लाइ उर लीन्ही। अति हित बहुत भाँति सिख दीन्ही।।
कहि बन के दुख दुसह सुनाए। सासु ससुर पितु सुख समुझाए।।
स्रोत अभिलेख 2.78 · पुस्तक पृ. 408, 408
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तब नृप सीय लाइ उर लीन्ही। अति हित बहुत भाँति सिख दीन्ही।।
English explanation
Then the king embraced Sita and, with deep affection, advised her in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| नृप | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| सीय | सीता को | Sita |
| लाइ | लगाकर | drawing close |
| उर | हृदय से | to his breast |
| लीन्ही | ले लिया | took; embraced |
| अति | अत्यंत | very great |
| हित | स्नेह से | with affection |
| बहुत | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| सिख | सीख; सलाह | advice |
| दीन्ही | दी | gave |
2 कहि बन के दुख दुसह सुनाए। सासु ससुर पितु सुख समुझाए।।
English explanation
He described the unbearable hardships of the forest and explained the comforts available with her mother-in-law, father-in-law, and father.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | by describing |
| बन | वन | the forest |
| के | के | of |
| दुख | दुख | hardships |
| दुसह | असहनीय | unbearable |
| सुनाए | सुनाए | recounted |
| सासु | सास के यहाँ | with her mother-in-law |
| ससुर | ससुर के यहाँ | with her father-in-law |
| पितु | पिता के यहाँ | with her father |
| सुख | सुख | comforts |
| समुझाए | समझाए | explained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 408
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 408, 408
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।