अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रायँ राम राखन हित लागी। बहुत उपाय किए छलु त्यागी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजाने इस प्रकार श्रीरामचन्द्रजीको रखनेके लिये छल छोड़कर बहुत-से उपाय किये। पर जब उन्होंने धर्मधुरन्धर, धीर और बुद्धिमान् श्रीरामजीका रुख देख लिया और वे रहते हुए न जान पड़े,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 408 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रायँ राम राखन हित लागी। बहुत उपाय किए छलु त्यागी।।
लखी राम रुख रहत न जाने। धरम धुरंधर धीर सयाने।।
स्रोत अभिलेख 2.78 · पुस्तक पृ. 408, 408
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रायँ राम राखन हित लागी। बहुत उपाय किए छलु त्यागी।।
English explanation
AI draft: King Dasharatha made many efforts, without deceit, to keep Rama from leaving.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रायँ | राजा दशरथ ने | King Dasharatha, as agent |
| राम | राम को | Rama |
| राखन | रोकने | keeping from leaving |
| हित | उद्देश्य से | for the purpose of |
| लागी | के लिए | for |
| बहुत | बहुत | many |
| उपाय | उपाय | efforts |
| किए | किए | made |
| छलु | छल-कपट | deceit |
| त्यागी | त्यागकर | having abandoned |
2 लखी राम रुख रहत न जाने। धरम धुरंधर धीर सयाने।।
English explanation
Seeing Rama’s resolve, the king understood that Rama, steadfast in upholding righteousness, composed and discerning, would not stay.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखी | देखकर | having perceived |
| राम | राम का | Rama’s |
| रुख | रुख; निश्चय | attitude; resolve |
| रहत | रुकने वाले | remaining; staying |
| न | नहीं | not |
| जाने | समझा | understood |
| धरम | धर्म का | of righteousness |
| धुरंधर | भार सँभालने वाले | staunch upholder |
| धीर | धैर्यवान | composed; steadfast |
| सयाने | विवेकी | discerning |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 408
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 408, 408
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।