अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सानुज सखा समेत मगन मन। बिसरे हरष सोक सुख दुख गन।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दछोटे भाई शत्रुघ्न और सखा निषादराजसमेत भरतजीका मन [प्रेममें] मग्न हो रहा है। हर्ष- शोक, सुख-दु:ख आदि सब भूल गये। 'हे नाथ ! रक्षा कीजिये, हे गुसाईं ! रक्षा कीजिये ऐसा कहकर वे पृथ्वीपर दण्डकी तरह गिर पड़े॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 543 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सानुज सखा समेत मगन मन। बिसरे हरष सोक सुख दुख गन।।
पाहि नाथ कहि पाहि गोसाई। भूतल परे लकुट की नाई।।
स्रोत अभिलेख 2.24 · पुस्तक पृ. 543, 544
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सानुज सखा समेत मगन मन। बिसरे हरष सोक सुख दुख गन।।
English explanation
AI-generated interpretation draft: Bharata, together with his younger brother and friend, was absorbed in love; joy, sorrow, pleasure, and pain were all forgotten.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सानुज | छोटे भाई सहित | with his younger brother |
| सखा | मित्र | friend |
| समेत | सहित | together with |
| मगन | प्रेम में डूबा हुआ | absorbed in love |
| मन | मन | mind |
| बिसरे | भूल गए | were forgotten |
| हरष | हर्ष | joy |
| सोक | शोक | sorrow |
| सुख | सुख | pleasure |
| दुख | दुःख | pain |
| गन | समस्त समूह | the whole range |
2 पाहि नाथ कहि पाहि गोसाई। भूतल परे लकुट की नाई।।
English explanation
Saying, “Protect me, my lord! Protect me, my master!” Bharata fell full-length upon the ground like a staff.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाहि | रक्षा कीजिए | protect me |
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| कहि | कहकर | saying |
| पाहि | रक्षा कीजिए | protect me |
| गोसाई | हे स्वामी | O master |
| भूतल | भूमि पर | upon the ground |
| परे | गिर पड़े | fell down |
| लकुट | लाठी | a staff |
| की | की | of |
| नाई | तरह | in the manner |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 543
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 543, 544
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।