अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बचन सपेम लखन पहिचाने। करत प्रनामु भरत जियँ जाने।।
मूल पाठ
बचन सपेम लखन पहिचाने। करत प्रनामु भरत जियँ जाने।।
बंधु सनेह सरस एहि ओरा। उत साहिब सेवा बस जोरा।।
स्रोत अभिलेख 2.24 · पुस्तक पृ. 543, 544
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रेमभरे वचनोंसे लक्ष्मणजीने पहचान लिया और मनमें जान लिया कि भरतजी प्रणाम कर रहे हैं। [वे श्रीरामजीकी ओर मुँह किये खड़े थे, भरतजी पीठ-पीछे थे; इससे उन्होंने देखा नहीं।] अब इस ओर तो भाई भरतजीका सरस प्रेम और उधर स्वामी श्रीरामचन्द्रजीकी सेवाकी प्रबल परवशता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 543 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बचन सपेम लखन पहिचाने। करत प्रनामु भरत जियँ जाने।।
English explanation
Lakshmana recognized the loving words and knew in his heart that Bharata was bowing in reverence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचन | words |
| सपेम | प्रेमभरे | filled with love |
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| पहिचाने | पहचान लिए | recognized |
| करत | करते हुए | performing |
| प्रनामु | प्रणाम | a reverential bow |
| भरत | भरत को | Bharata, Rama’s brother |
| जियँ | मन में | in his heart |
| जाने | जान लिया | knew |
2 बंधु सनेह सरस एहि ओरा। उत साहिब सेवा बस जोरा।।
English explanation
On one side was the sweetness of brotherly affection; on the other, duty in his master’s service held Lakshmana bound.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंधु | भाई का | for his brother |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सरस | मधुर और रसपूर्ण | sweet and tender |
| एहि | इस | this |
| ओरा | ओर | side |
| उत | उधर, दूसरी ओर | on the other side |
| साहिब | स्वामी राम की | of his master Rama |
| सेवा | सेवा | service |
| बस | वश में | under its constraint |
| जोरा | बंधे हुए | held bound |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 543
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 543, 544
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।