अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सादर पुनि पुनि पूँछति ओही। सबरी गान मृगी जनु मोही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबार-बार रानी उससे आदरके साथ पूछ रही हैं, मानो भीलनीके गानसे हिरनी मोहित हो गयी हो। जैसी भावी (होनहार) है, वैसी ही बुद्धि भी फिर गयी। दासी अपना दाँव लगा जानकर हॢषत हुई॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 357 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सादर पुनि पुनि पूँछति ओही। सबरी गान मृगी जनु मोही।।
तसि मति फिरी अहइ जसि भाबी। रहसी चेरि घात जनु फाबी।।
स्रोत अभिलेख 2.17 · पुस्तक पृ. 357, 358
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सादर पुनि पुनि पूँछति ओही। सबरी गान मृगी जनु मोही।।
English explanation
AI draft: Kaikeyi respectfully questions Manthara again and again, like a doe enchanted by a tribal huntress’s song.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| पूँछति | पूछती हैं | asks |
| ओही | उसी मंथरा से | that same Manthara |
| सबरी | शबर जाति की स्त्री, शिकारी स्त्री | a tribal woman or huntress |
| गान | गान से | by the song |
| मृगी | हिरनी | a doe |
| जनु | मानो | as though |
| मोही | मोहित हुई | enchanted |
2 तसि मति फिरी अहइ जसि भाबी। रहसी चेरि घात जनु फाबी।।
English explanation
Kaikeyi’s judgment turned as impending fate ordained. The maid Manthara rejoiced, as though her stratagem had succeeded.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तसि | वैसी | in that manner |
| मति | बुद्धि | judgment |
| फिरी | पलट गई | turned |
| अहइ | है | is |
| जसि | जैसी | as |
| भाबी | होनहार | what was destined to happen |
| रहसी | प्रसन्न हुई | rejoiced |
| चेरि | दासी मंथरा | the maid Manthara |
| घात | दाँव या चाल | stratagem |
| जनु | मानो | as though |
| फाबी | सफल हुई | succeeded |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 357
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 357, 358
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।