अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सहित समाज राउ मिथिलेसू। बहुत दिवस भए सहत कलेसू।।
मूल पाठ
सहित समाज राउ मिथिलेसू। बहुत दिवस भए सहत कलेसू।।
उचित होइ सोइ कीजिअ नाथा। हित सबही कर रौरें हाथा।।
स्रोत अभिलेख 2.29 · पुस्तक पृ. 586, 586
भावार्थ
मूल पाठ के बादमिथिलापति राजा जनकजीको भी समाजसहित क्लेश सहते बहुत दिन हो गये। इसलिये हे नाथ! जो उचित हो वही कीजिये। आपहीके हाथ सभीका हित है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 586 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सहित समाज राउ मिथिलेसू। बहुत दिवस भए सहत कलेसू।।
English explanation
King Janaka of Mithila, together with his entourage, has also been enduring hardship for many days.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहित | साथ | together with |
| समाज | अपने समाज के | his entourage |
| राउ | राजा | the king |
| मिथिलेसू | मिथिला के स्वामी जनक | Janaka, ruler of Mithila |
| बहुत | बहुत | many |
| दिवस | दिन | days |
| भए | हो गए हैं | have elapsed |
| सहत | सहते हुए | while enduring |
| कलेसू | कष्ट | hardship |
2 उचित होइ सोइ कीजिअ नाथा। हित सबही कर रौरें हाथा।।
English explanation
Master, do whatever is appropriate; everyone’s welfare is in your hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उचित | उचित | appropriate |
| होइ | हो | may be |
| सोइ | वही | that very thing |
| कीजिअ | कीजिए | please do |
| नाथा | हे नाथ | O master |
| हित | कल्याण | welfare |
| सबही | सभी | everyone |
| कर | का | of |
| रौरें | आपके | your |
| हाथा | हाथ में | in hands |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 586
- सहायक विषय
- जनक-सुनयना-संवाद, भरतजीकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 586, 586
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