अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सहज सुभाय सुभग तन गोरे। नामु लखनु लघु देवर मोरे।।
मूल पाठ
सहज सुभाय सुभग तन गोरे। नामु लखनु लघु देवर मोरे।।
बहुरि बदनु बिधु अंचल ढाँकी। पिय तन चितइ भौंह करि बाँकी।।
स्रोत अभिलेख 2.117 · पुस्तक पृ. 440, 441
भावार्थ
मूल पाठ के बादये जो सहजस्वभाव, सुन्दर और गोरे शरीरके हैं,उनका नाम लक्ष्मण है; ये मेरे छोटे देवर हैं। फिर सीताजीने [लज्जावश] अपने चन्द्रमुखको आँचलसे ढककर और प्रियतम (श्रीरामजी) की ओर निहारकर भौंहें टेढ़ी करके,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 441 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सहज सुभाय सुभग तन गोरे। नामु लखनु लघु देवर मोरे।।
English explanation
Naturally handsome and fair of body, he is named Lakshmana and is my younger brother-in-law.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वाभाविक | natural |
| सुभाय | स्वभाव से | by disposition |
| सुभग | सुंदर | handsome |
| तन | शरीर | body |
| गोरे | गोरा | fair |
| नामु | नाम | name |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| लघु | छोटे | younger |
| देवर | पति के छोटे भाई | husband’s younger brother |
| मोरे | मेरे | my |
2 बहुरि बदनु बिधु अंचल ढाँकी। पिय तन चितइ भौंह करि बाँकी।।
English explanation
Then, covering her moonlike face with her sari’s end and arching her brows, Sita glanced toward her beloved husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| बदनु | मुख | face |
| बिधु | चंद्रमा जैसा | moonlike |
| अंचल | आँचल से | with the sari’s end |
| ढाँकी | ढककर | having covered |
| पिय | प्रिय पति | beloved husband |
| तन | की ओर | toward |
| चितइ | देखकर | glancing |
| भौंह | भौंहें | eyebrows |
| करि | करके | making |
| बाँकी | तिरछी | arched |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 441
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 440, 441
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।