अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ससुर चक्कवइ कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।।
मूल पाठ
ससुर चक्कवइ कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।।
आगें होइ जेहि सुरपति लेई। अरध सिंघासन आसनु देई।।
स्रोत अभिलेख 2.98 · पुस्तक पृ. 424, 425
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरे ससुर कोसलराज चक्रवर्ती सम्राट् हैं, जिनका प्रभाव चौदहों लोकोंमें प्रकट है; इन्द्र भी आगे होकर जिनका स्वागत करता है और अपने आधे सिंहासनपर बैठनेके लिये स्थान देता है,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 424 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ससुर चक्कवइ कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।।
English explanation
My father-in-law is the sovereign king of Kosala, whose might is manifest throughout the fourteen worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ससुर | ससुर, राजा दशरथ | father-in-law, King Dasharatha |
| चक्कवइ | चक्रवर्ती सम्राट | sovereign emperor |
| कोसलराऊ | कोसल के राजा | king of Kosala |
| भुवन | लोकों में | in the worlds |
| चारिदस | चौदह | fourteen |
| प्रगट | प्रकट; प्रसिद्ध | manifest; renowned |
| प्रभाऊ | प्रताप; प्रभाव | might and influence |
2 आगें होइ जेहि सुरपति लेई। अरध सिंघासन आसनु देई।।
English explanation
Indra, king of the gods, comes forward to receive him and offers him a seat on half of his throne.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगें | आगे; स्वागत के लिए आगे | forward, to welcome |
| होइ | होकर; बढ़कर | coming; stepping |
| जेहि | जिन्हें | whom |
| सुरपति | देवताओं के राजा इंद्र | Indra, king of the gods |
| लेई | स्वागत करके लेते हैं | receives; welcomes |
| अरध | आधा | half |
| सिंघासन | सिंहासन | throne |
| आसनु | बैठने का स्थान | a seat |
| देई | देते हैं | gives; offers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.98
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 424
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 424, 425
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।