अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ससुरु एतादृस अवध निवासू। प्रिय परिवारु मातु सम सासू।।
मूल पाठ
ससुरु एतादृस अवध निवासू। प्रिय परिवारु मातु सम सासू।।
बिनु रघुपति पद पदुम परागा। मोहि केउ सपनेहुँ सुखद न लागा।।
स्रोत अभिलेख 2.98 · पुस्तक पृ. 424, 425
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसे [ऐश्वर्य और प्रभावशाली] ससुर; [उनकी राजधानी] अयोध्याका निवास; प्रिय कुटुम्बी और माताके समान सासुएँ—ये कोई भी श्रीरघुनाथजीके चरणकमलोंकी रजके बिना मुझे स्वप्रमें भी सुखदायक नहीं लगते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 424 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ससुरु एतादृस अवध निवासू। प्रिय परिवारु मातु सम सासू।।
English explanation
Such is my father-in-law; Ayodhya is my home, the family is dear to me, and my mothers-in-law are like mothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ससुरु | ससुर, दशरथ | father-in-law, Dasharatha |
| एतादृस | ऐसे; इस प्रकार के | such; of this kind |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| निवासू | निवास-स्थान | place of residence |
| प्रिय | प्रिय; स्नेहपूर्ण | dear; beloved |
| परिवारु | परिवार | family |
| मातु | माता | mother |
| सम | के समान | like |
| सासू | सासें | mothers-in-law |
2 बिनु रघुपति पद पदुम परागा। मोहि केउ सपनेहुँ सुखद न लागा।।
English explanation
Yet without the dust of Rama’s lotus-like feet, none of these seemed delightful to me, even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | के बिना | without |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| पद | चरण | feet |
| पदुम | कमल | lotus |
| परागा | पराग; चरणों की धूल | pollen; dust of the feet |
| मोहि | मुझे | to me |
| केउ | कोई भी; इनमें से कुछ भी | any; anything among these |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| सुखद | सुख देने वाला | giving happiness |
| न | नहीं | not |
| लागा | लगा | seemed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.98
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 424
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 424, 425
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।