अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अगम पंथ बनभूमि पहारा। करि केहरि सर सरित अपारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददुर्गम रास्ते, जंगली धरती, पहाड़, हाथी, सिंह, अथाह तालाब एवं नदियाँ; कोल,भील, हिरन और पक्षी—प्राणपति (रघुनाथजी) के साथ रहते ये सभी मुझे सुख देनेवाले होंगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 425 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अगम पंथ बनभूमि पहारा। करि केहरि सर सरित अपारा।।
कोल किरात कुरंग बिहंगा। मोहि सब सुखद प्रानपति संगा।।
स्रोत अभिलेख 2.98 · पुस्तक पृ. 424, 425
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अगम पंथ बनभूमि पहारा। करि केहरि सर सरित अपारा।।
English explanation
Difficult paths, forest terrain, mountains, elephants, lions, lakes, and vast rivers—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अगम | दुर्गम; कठिनाई से पार होने वाला | difficult to traverse |
| पंथ | मार्ग | paths |
| बनभूमि | वन की भूमि | forest terrain |
| पहारा | पहाड़ | mountains |
| करि | हाथी | elephants |
| केहरि | सिंह | lions |
| सर | सरोवर | lakes |
| सरित | नदियाँ | rivers |
| अपारा | अपार; विशाल | vast; boundless |
2 कोल किरात कुरंग बिहंगा। मोहि सब सुखद प्रानपति संगा।।
English explanation
The Kol and Kirata forest communities, deer, and birds—all these delight me in the company of my dearly beloved husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोल | कोल वनवासी समुदाय के लोग | people of the Kol forest community |
| किरात | किरात वनवासी समुदाय के लोग | people of the Kirata forest community |
| कुरंग | हिरन | deer |
| बिहंगा | पक्षी | birds |
| मोहि | मुझे | to me |
| सब | सभी | all |
| सुखद | सुख देने वाले | delightful |
| प्रानपति | प्राणप्रिय पति राम के | of Rama, my dearly beloved husband |
| संगा | साथ में | in the company of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.98
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 425
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 424, 425
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।