अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सम महि तृन तरुपल्लव डासी। पाग पलोटिहि सब निसि दासी।।
मूल पाठ
सम महि तृन तरुपल्लव डासी। पाग पलोटिहि सब निसि दासी।।
बारबार मृदु मूरति जोही। लागहि तात बयारि न मोही।
स्रोत अभिलेख 2.67 · पुस्तक पृ. 399, 399
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमतल भूमिपर घास और पेड़ोंके पत्ते बिछाकर यह दासी रातभर आपके चरण दबावेगी। बार- बार आपकी कोमल मूॢतको देखकर मुझको गरम हवा भी न लगेगी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 399 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सम महि तृन तरुपल्लव डासी। पाग पलोटिहि सब निसि दासी।।
English explanation
Spreading grass and tender tree leaves on level ground, this servant of yours will massage your feet all night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सम | समतल | level |
| महि | धरती पर | on the ground |
| तृन | घास | grass |
| तरुपल्लव | पेड़ों के कोमल पत्ते | tender tree leaves |
| डासी | बिछाकर | having spread |
| पाग | आपके पैर | your feet |
| पलोटिहि | दबाएगी; मालिश करेगी | will massage |
| सब | सारी | whole |
| निसि | रात | night |
| दासी | आपकी दासी, मैं | your servant, myself |
2 बारबार मृदु मूरति जोही। लागहि तात बयारि न मोही।
English explanation
As I repeatedly gaze at your tender form, the hot wind will not trouble me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारबार | बार-बार | repeatedly |
| मृदु | कोमल | tender |
| मूरति | आपका रूप | your form |
| जोही | निहारते हुए | gazing at |
| लागहि | लगेगी; प्रभावित करेगी | will affect |
| तात | गरम | hot |
| बयारि | हवा | wind |
| न | नहीं | not |
| मोही | मुझे | me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.67
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 399
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 399, 399
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।