अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
को प्रभु सँग मोहि चितवनिहारा। सिंघबधुहि जिमि ससक सिआरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रभुके साथ [रहते] मेरी ओर [आँख उठाकर] देखनेवाला कौन है (अर्थात् कोई नहीं देख सकता)! जैसे सिंहकी स्त्री (सिंहनी) को खरगोश और सियार नहीं देख सकते। मैं सुकुमारी हूँ और नाथ वनके योग्य हैं? आपको तो तपस्या उचित है और मुझको विषय-भोग?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 399 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
को प्रभु सँग मोहि चितवनिहारा। सिंघबधुहि जिमि ससक सिआरा।।
मैं सुकुमारि नाथ बन जोगू। तुम्हहि उचित तप मो कहुँ भोगू।।
स्रोत अभिलेख 2.67 · पुस्तक पृ. 399, 399
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 को प्रभु सँग मोहि चितवनिहारा। सिंघबधुहि जिमि ससक सिआरा।।
English explanation
Who would dare cast a threatening gaze at me while I am with my lord—just as what hare or jackal would dare eye a lion’s mate?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| प्रभु | मेरे स्वामी राम के | my lord Rama |
| सँग | साथ | with |
| मोहि | मुझे | at me |
| चितवनिहारा | नज़र डालने वाला | one who would cast a gaze |
| सिंघबधुहि | सिंह की संगिनी को | at a lion’s mate |
| जिमि | जैसे | just as |
| ससक | खरगोश | hare |
| सिआरा | सियार | jackal |
2 मैं सुकुमारि नाथ बन जोगू। तुम्हहि उचित तप मो कहुँ भोगू।।
English explanation
My lord, am I alone delicate and unfit for the forest? Is austerity fitting for you, and comfort for me?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| सुकुमारि | कोमल स्त्री | delicate woman |
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| बन | वन के | for the forest |
| जोगू | योग्य | suited |
| तुम्हहि | आपके लिए | for you |
| उचित | उपयुक्त | fitting |
| तप | तपस्या | austerity |
| मो | मेरे | me |
| कहुँ | लिए | for |
| भोगू | सुख-भोग | comfort and enjoyment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.67
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 399
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 399, 399
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।