अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पाय पखारी बैठि तरु छाहीं। करिहउँ बाउ मुदित मन माहीं।।
मूल पाठ
पाय पखारी बैठि तरु छाहीं। करिहउँ बाउ मुदित मन माहीं।।
श्रम कन सहित स्याम तनु देखें। कहँ दुख समउ प्रानपति पेखें।।
स्रोत अभिलेख 2.67 · पुस्तक पृ. 399, 399
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपके पैर धोकर, पेड़ोंकी छायामें बैठकर, मनमें प्रसन्न होकर हवा करूँगी (पंखा झलूँगी)। पसीनेकी बूँदोंसहित श्याम शरीरको देखकर—प्राणपतिके दर्शन करते हुए दु:खके लिये मुझे अवकाश ही कहाँ रहेगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 399 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पाय पखारी बैठि तरु छाहीं। करिहउँ बाउ मुदित मन माहीं।।
English explanation
After washing your feet, I will sit in a tree’s shade and fan you with a joyful heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाय | आपके पैर | your feet |
| पखारी | धोकर | having washed |
| बैठि | बैठकर | sitting |
| तरु | पेड़ की | a tree’s |
| छाहीं | छाया में | in the shade |
| करिहउँ | मैं करूँगी | I will make |
| बाउ | हवा; पंखा करना | a breeze; fanning |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| मन | मन | heart |
| माहीं | में | within |
2 श्रम कन सहित स्याम तनु देखें। कहँ दुख समउ प्रानपति पेखें।।
English explanation
Seeing your dark body covered with beads of perspiration, gazing at my dearly beloved husband, where could sorrow find room?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रम | परिश्रम का पसीना | perspiration from exertion |
| कन | कण; बूँदें | beads; droplets |
| सहित | से युक्त | covered with |
| स्याम | साँवला | dark-hued |
| तनु | शरीर | body |
| देखें | देखने पर | on seeing |
| कहँ | कहाँ | where |
| दुख | दुःख | sorrow |
| समउ | समाए | could find room |
| प्रानपति | प्राणप्रिय पति को | my dearly beloved husband |
| पेखें | निहारने पर | on gazing at |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.67
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 399
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 399, 399
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।