अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सभा सकल सुनि रघुबर बानी। प्रेम पयोधि अमिअ जनु सानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरघुनाथजीकी वाणी सुनकर, जो मानो प्रेमरूपी समुद्रके [मन्थनसे निकले हुए] अमृतमें सनी हुई थी, सारा समाज शिथिल हो गया; सबको प्रेमसमाधि लग गयी। यह दशा देखकर सरस्वतीने चुप साध ली॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 601 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सभा सकल सुनि रघुबर बानी। प्रेम पयोधि अमिअ जनु सानी।।
सिथिल समाज सनेह समाधी। देखि दसा चुप सारद साधी।।
स्रोत अभिलेख 2.307 · पुस्तक पृ. 601, 601
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सभा सकल सुनि रघुबर बानी। प्रेम पयोधि अमिअ जनु सानी।।
English explanation
AI draft: Hearing Rama’s words, the entire assembly seemed steeped in the nectar of the ocean of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सभा | सभा | assembly |
| सकल | सारी | entire |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम की | of Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| बानी | वाणी | words |
| प्रेम | प्रेम का | of love |
| पयोधि | समुद्र | ocean |
| अमिअ | अमृत में | in nectar |
| जनु | मानो | as though |
| सानी | सन गई | was steeped |
2 सिथिल समाज सनेह समाधी। देखि दसा चुप सारद साधी।।
English explanation
The assembly grew motionless in love’s deep absorption; seeing this state, even Saraswati fell silent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिथिल | शिथिल, निश्चेष्ट | motionless, relaxed |
| समाज | सभा | assembly |
| सनेह | प्रेम की | of love |
| समाधी | गहन तन्मयता में | in deep absorption |
| देखि | देखकर | seeing |
| दसा | दशा | condition |
| चुप | मौन | silence |
| सारद | वाणी की देवी सरस्वती ने | Saraswati, goddess of speech |
| साधी | साध लिया | maintained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.307
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 601
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 601, 601
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।