अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब समाजु सजि सिधि पल माहीं। जे सुख सुरपुर सपनेहुँ नाहीं।।
मूल पाठ
सब समाजु सजि सिधि पल माहीं। जे सुख सुरपुर सपनेहुँ नाहीं।।
प्रथमहिं बास दिए सब केही। सुंदर सुखद जथा रुचि जेही।।
स्रोत अभिलेख 2.214 · पुस्तक पृ. 521, 521
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो सुखके सामान स्वर्गमें भी स्वप्रमें भी नहीं हैं ऐसे सब सामान सिद्धियोंने पलभरमें सज दिये। पहले तो उन्होंने सब किसीको, जिसकी जैसी रुचि थी वैसे ही, सुन्दर सुखदायक निवासस्थान दिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 521 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सब समाजु सजि सिधि पल माहीं। जे सुख सुरपुर सपनेहुँ नाहीं।।
English explanation
In a moment the supernatural powers arranged everything, providing comforts not found even in dreams in the gods’ city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सारी | all |
| समाजु | व्यवस्था; सामग्री | arrangements; provisions |
| सजि | सजाकर; तैयार करके | arranging; making ready |
| सिधि | सिद्धियों ने | the supernatural powers |
| पल | एक पल | a moment |
| माहीं | में; भीतर | in; within |
| जे | जो; ऐसे | which; such |
| सुख | सुख; आराम | pleasures; comforts |
| सुरपुर | देवताओं की नगरी में | in the gods’ city |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in dreams |
| नाहीं | नहीं हैं | are not found |
2 प्रथमहिं बास दिए सब केही। सुंदर सुखद जथा रुचि जेही।।
English explanation
First, everyone was given beautiful, comfortable lodging according to their individual preference.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथमहिं | सबसे पहले ही | at the very outset |
| बास | आवास; रहने के स्थान | lodgings; places to stay |
| दिए | दिए गए | were given |
| सब | सब | everyone |
| केही | को | to |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सुखद | सुख देने वाले | comfortable; pleasant |
| जथा | के अनुसार; जैसी | according to; as |
| रुचि | पसंद; इच्छा | preference; taste |
| जेही | जिसकी; जिस व्यक्ति की | of each respective person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.214
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 521
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 521, 521
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।