अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भोग बिभूति भूरि भरि राखे। देखत जिन्हहि अमर अभिलाषे।।
मूल पाठ
भोग बिभूति भूरि भरि राखे। देखत जिन्हहि अमर अभिलाषे।।
दासीं दास साजु सब लीन्हें। जोगवत रहहिं मनहि मनु दीन्हें।।
स्रोत अभिलेख 2.214 · पुस्तक पृ. 521, 521
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन घरोंमें बहुत-से भोग (इन्द्रियोंके विषय) और ऐश्वर्य (ठाट-बाट) का सामान भरकर रख दिया, जिन्हें देखकर देवता भी ललचा गये। दासी-दास सब प्रकारकी सामग्री लिये हुए मन लगाकर उनके मनोंको देखते रहते हैं (अर्थात् उनके मनकी रुचिके अनुसार करते रहते हैं)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 521 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भोग बिभूति भूरि भरि राखे। देखत जिन्हहि अमर अभिलाषे।।
English explanation
The dwellings were abundantly stocked with comforts and riches, which even the gods desired on seeing them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भोग | भोग और सुख की सामग्री | articles of enjoyment and comfort |
| बिभूति | वैभव; ऐश्वर्य | riches; splendor |
| भूरि | बहुत अधिक; भरपूर | abundant; plentiful |
| भरि | भरकर | filling; stocking |
| राखे | रख दिए | placed; provided |
| देखत | देखते ही | upon seeing |
| जिन्हहि | जिन्हें; जिन वस्तुओं को | which things |
| अमर | देवता | the gods |
| अभिलाषे | चाहने लगे; लालायित हुए | desired; longed for |
2 दासीं दास साजु सब लीन्हें। जोगवत रहहिं मनहि मनु दीन्हें।।
English explanation
Maidservants, servants, and all necessary furnishings were provided; they remain attentive to the guests, attuning their minds to the guests’ wishes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दासीं | दासियाँ; सेविकाएँ | maidservants; female attendants |
| दास | दास; सेवक | servants; male attendants |
| साजु | साज-सामान; आवश्यक उपकरण | furnishings; necessary equipment |
| सब | सब | all |
| लीन्हें | जुटा लिए; व्यवस्था कर ली | procured; arranged |
| जोगवत | ध्यान रखते; देखभाल करते | attending to; looking after |
| रहहिं | रहते हैं | continue to be |
| मनहि | अतिथियों के मन में; उनके मन से | to the guests’ minds |
| मनु | अपना मन; ध्यान | their own minds; attention |
| दीन्हें | दिए हुए; लगाए हुए | devoted; directed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.214
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 521
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 521, 521
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।