अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि पद बंदि करिअ सोइ आजू। होइ सुखी सब राज समाजू।।
मूल पाठ
मुनि पद बंदि करिअ सोइ आजू। होइ सुखी सब राज समाजू।।
अस कहि रचेउ रुचिर गृह नाना। जेहि बिलोकि बिलखाहिं बिमाना।।
स्रोत अभिलेख 2.214 · पुस्तक पृ. 521, 521
भावार्थ
मूल पाठ के बादअत: मुनिके चरणोंकी वन्दना करके आज वही करना चाहिये जिससे सारा राज-समाज सुखी हो। ऐसा कहकर उन्होंने बहुत-से सुन्दर घर बनाये, जिन्हें देखकर विमान भी विलखते हैं (लजा जाते हैं)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 521 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनि पद बंदि करिअ सोइ आजू। होइ सुखी सब राज समाजू।।
English explanation
Having bowed to the sage’s feet, let us do today what will make the entire royal company happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि भरद्वाज के | of sage Bharadvaja |
| पद | चरणों को | the feet |
| बंदि | प्रणाम करके | having bowed to |
| करिअ | हम करें | let us do |
| सोइ | वही कार्य | that very thing |
| आजू | आज | today |
| होइ | हो जाए | may become |
| सुखी | सुखी; प्रसन्न | happy; comfortable |
| सब | सारा | the entire |
| राज | राजकीय | royal |
| समाजू | समुदाय; साथ आए लोग | company; accompanying people |
2 अस कहि रचेउ रुचिर गृह नाना। जेहि बिलोकि बिलखाहिं बिमाना।।
English explanation
Saying this, they created many beautiful dwellings, at whose sight even celestial palaces seem to lament, outshone by them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| रचेउ | रच दिया; बना दिया | created; fashioned |
| रुचिर | सुंदर; मनोहर | beautiful; lovely |
| गृह | भवन; आवास | dwellings; houses |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| जेहि | जिन्हें | which |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| बिलखाहिं | विलाप करते हैं; खिन्न होते हैं | lament; feel abashed |
| बिमाना | देवताओं के विमान; दिव्य महल | celestial aerial palaces |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.214
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 521
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 521, 521
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।