अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी। बोलेउ राउ रहँसि मृदु बानी।।
मूल पाठ
सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी। बोलेउ राउ रहँसि मृदु बानी।।
नाथ रामु करिअहिं जुबराजू। कहिअ कृपा करि करिअ समाजू।।
स्रोत अभिलेख 2.4 · पुस्तक पृ. 346, 347
भावार्थ
मूल पाठ के बादअपने जीमें गुरुजीको सब प्रकारसे प्रसन्न जानकर, हॢषत होकर राजा कोमल वाणीसे बोले—हे नाथ! श्रीरामचन्द्रको युवराज कीजिये। कृपा करके कहिये (आज्ञा दीजिये) तो तैयारी की जाय॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 346 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी। बोलेउ राउ रहँसि मृदु बानी।।
English explanation
Knowing in his heart that the guru was pleased in every way, King Dasharatha spoke joyfully and gently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब | every |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| गुरु | गुरु वसिष्ठ को | the guru, Vasishtha |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| जियँ | मन में | in his heart |
| जानी | जानकर | knowing |
| बोलेउ | बोले | spoke |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| रहँसि | हर्षित होकर | joyfully |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
2 नाथ रामु करिअहिं जुबराजू। कहिअ कृपा करि करिअ समाजू।।
English explanation
Master, let Rama be made crown prince. Kindly give the command and have the preparations made.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे नाथ | O master |
| रामु | राम को | Rama |
| करिअहिं | बनाया जाए | let him be made |
| जुबराजू | युवराज | crown prince |
| कहिअ | आज्ञा दीजिए | give the command |
| कृपा | कृपा | kindness |
| करि | करके | showing |
| करिअ | कराइए | have made |
| समाजू | समारोह की तैयारी | the ceremonial preparations |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 346
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 346, 347
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।