अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोहि अछत यहु होइ उछाहू। लहहिं लोग सब लोचन लाहू।।
मूल पाठ
मोहि अछत यहु होइ उछाहू। लहहिं लोग सब लोचन लाहू।।
प्रभु प्रसाद सिव सबइ निबाहीं। यह लालसा एक मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.4 · पुस्तक पृ. 346, 347
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरे जीते-जी यह आनन्द-उत्सव हो जाय, [जिससे] सब लोग अपने नेत्रोंका लाभ प्राप्त करें। प्रभु (आप)-के प्रसादसे शिवजीने सब कुछ निबाह दिया (सब इच्छाएँ पूर्ण कर दीं), केवल यही एक लालसा मनमें रह गयी है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 346 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मोहि अछत यहु होइ उछाहू। लहहिं लोग सब लोचन लाहू।।
English explanation
May this celebration take place while I am still alive, and may everyone enjoy the reward of seeing it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मेरे | while I |
| अछत | रहते हुए | am still alive |
| यहु | यह | this |
| होइ | हो | may take place |
| उछाहू | उत्सव | celebration |
| लहहिं | प्राप्त करें | may receive |
| लोग | लोग | people |
| सब | सभी | all |
| लोचन | नेत्रों का | of their eyes |
| लाहू | लाभ | reward |
2 प्रभु प्रसाद सिव सबइ निबाहीं। यह लालसा एक मन माहीं।।
English explanation
Through your grace, Shiva has fulfilled all my wishes; this one longing remains in my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | आपकी, हे प्रभु | your, O master |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| सिव | शिव ने | Shiva |
| सबइ | सभी इच्छाएँ | all my wishes |
| निबाहीं | पूरी की हैं | has fulfilled |
| यह | यह | this |
| लालसा | इच्छा | longing |
| एक | एक | one |
| मन | मन | heart |
| माहीं | में | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 346
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 346, 347
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।