अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सबहिं बिचार कीन्ह मन माहीं। राम लखन सिय बिनु सुखु नाहीं।।
मूल पाठ
सबहिं बिचार कीन्ह मन माहीं। राम लखन सिय बिनु सुखु नाहीं।।
जहाँ रामु तहँ सबुइ समाजू। बिनु रघुबीर अवध नहिं काजू।।
स्रोत अभिलेख 2.84 · पुस्तक पृ. 412, 413
भावार्थ
मूल पाठ के बादसबने मनमें विचार कर लिया कि श्रीरामजी, लक्ष्मणजी और सीताजीके बिना सुख नहीं है। जहाँ श्रीरामजी रहेंगे, वहीं सारा समाज रहेगा। श्रीरामचन्द्रजीके बिना अयोध्यामें हमलोगोंका कुछ काम नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 413 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सबहिं बिचार कीन्ह मन माहीं। राम लखन सिय बिनु सुखु नाहीं।।
English explanation
Everyone reflected inwardly that there is no happiness without Rama, Lakshmana, and Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबहिं | सबने | everyone |
| बिचार | विचार | reflection |
| कीन्ह | किया | made |
| मन | मन | the mind |
| माहीं | के भीतर | within |
| राम | राम | Rama |
| लखन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama's brother |
| सिय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama's wife |
| बिनु | के बिना | without |
| सुखु | सुख | happiness |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
2 जहाँ रामु तहँ सबुइ समाजू। बिनु रघुबीर अवध नहिं काजू।।
English explanation
Where Rama is, there is the entire community; without Rama, Ayodhya is of no use.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहाँ | जहाँ | where |
| रामु | राम हैं | Rama is |
| तहँ | वहीं | there |
| सबुइ | सारा ही | the entire |
| समाजू | समुदाय | community |
| बिनु | के बिना | without |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu's line |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| नहिं | नहीं | not |
| काजू | किसी काम की | of any use |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.84
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 413
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 412, 413
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