अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सगुन खीरु अवगुन जलु ताता। मिलइ रचइ परपंचु बिधाता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे तात! गुणरूपी दूध और अवगुणरूपी जलको मिलाकर विधाता इस दृश्य-प्रपञ्च (जगत्)को रचता है। परन्तु भरतने सूर्यवंशरूपी तालाबमें हंसरूप जन्म लेकर गुण और दोषका विभाग कर दिया (दोनोंको अलग-अलग कर दिया)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 537 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सगुन खीरु अवगुन जलु ताता। मिलइ रचइ परपंचु बिधाता।।
भरतु हंस रबिबंस तड़ागा। जनमि कीन्ह गुन दोष बिभागा।।
स्रोत अभिलेख 2.232 · पुस्तक पृ. 536, 537
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सगुन खीरु अवगुन जलु ताता। मिलइ रचइ परपंचु बिधाता।।
English explanation
Dear one, virtues are milk and faults are water; the Creator mixes them to fashion the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सगुन | सद्गुण | virtues |
| खीरु | दूध | milk |
| अवगुन | दुर्गुण | faults |
| जलु | पानी | water |
| ताता | हे प्रिय | dear one |
| मिलइ | मिलाता है | mixes together |
| रचइ | रचता है | creates |
| परपंचु | संसार, सृष्टि का विस्तार | the world; the manifold creation |
| बिधाता | विधाता, सृष्टिकर्ता | the Creator |
2 भरतु हंस रबिबंस तड़ागा। जनमि कीन्ह गुन दोष बिभागा।।
English explanation
Bharata is the swan in the lake of the Solar dynasty; upon taking birth, he distinguished virtues from faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत | Bharata, Rama's brother |
| हंस | हंस | a swan |
| रबिबंस | सूर्यवंश रूपी | the Solar dynasty, pictured as |
| तड़ागा | सरोवर | a lake |
| जनमि | जन्म लेकर | having taken birth |
| कीन्ह | किया | made |
| गुन | गुणों का | virtues |
| दोष | दोषों का | faults |
| बिभागा | पृथक्करण, भेद | separation; distinction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.232
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 537
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका लक्ष्मणजीको समझाना एवं भरतजीकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 536, 537
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।