अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गहि गुन पय तजि अवगुन बारी। निज जस जगत कीन्हि उजिआरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगुणरूपी दूधको ग्रहणकर और अवगुणरूपी जलको त्यागकर भरतने अपने यशसे जगत्में उजियाला कर दिया है। भरतजीके गुण, शील और स्वभावको कहते-कहते श्रीरघुनाथजी प्रेमसमुद्रमें मग्र हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 537 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गहि गुन पय तजि अवगुन बारी। निज जस जगत कीन्हि उजिआरी।।
कहत भरत गुन सीलु सुभाऊ। पेम पयोधि मगन रघुराऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.232 · पुस्तक पृ. 536, 537
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गहि गुन पय तजि अवगुन बारी। निज जस जगत कीन्हि उजिआरी।।
English explanation
Taking the milk of virtues and leaving the water of faults, Bharata illuminated the world with his own renown.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहि | ग्रहण करके | having taken |
| गुन | गुण रूपी | virtues, pictured as |
| पय | दूध | milk |
| तजि | छोड़कर | having discarded |
| अवगुन | दुर्गुण रूपी | faults, pictured as |
| बारी | पानी | water |
| निज | अपनी | his own |
| जस | कीर्ति से | with renown |
| जगत | संसार में | throughout the world |
| कीन्हि | कर दी | made |
| उजिआरी | उजियाली, प्रकाश | brightness; illumination |
2 कहत भरत गुन सीलु सुभाऊ। पेम पयोधि मगन रघुराऊ।।
English explanation
While describing Bharata's virtues, conduct, and disposition, Rama became immersed in an ocean of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | while describing |
| भरत | भरत के | Bharata's |
| गुन | गुण | virtues |
| सीलु | सदाचार, शील | good conduct; character |
| सुभाऊ | स्वभाव | disposition |
| पेम | प्रेम के | of love |
| पयोधि | सागर में | in the ocean |
| मगन | डूबे हुए | immersed |
| रघुराऊ | रघुवंश के राजा श्रीराम | Rama, lord of the Raghu dynasty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.232
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 537
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका लक्ष्मणजीको समझाना एवं भरतजीकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 536, 537
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