अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकुच सनेहु मोदु मन बाढ़ा। भरतहि चितवत एकटक ठाढ़ा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउसके मनमें संकोच, प्रेम और आनन्द इतना बढ़ गया कि वह खड़ा-खड़ा टकटकी लगाये भरतजीको देखता रहा। फिर धीरज धरकर भरतजीके चरणोंकी वन्दना करके प्रेमके साथ हाथ जोड़कर विनती करने लगा—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 505 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सकुच सनेहु मोदु मन बाढ़ा। भरतहि चितवत एकटक ठाढ़ा।।
धरि धीरजु पद बंदि बहोरी। बिनय सप्रेम करत कर जोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.195 · पुस्तक पृ. 505, 505
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सकुच सनेहु मोदु मन बाढ़ा। भरतहि चितवत एकटक ठाढ़ा।।
English explanation
Shyness, affection, and joy grew in his heart; he stood gazing steadily at Bharata.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकुच | संकोच | shyness |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| मोदु | आनंद | joy |
| मन | मन में | in his heart |
| बाढ़ा | बढ़ गया | increased |
| भरतहि | भरत को | at Bharata |
| चितवत | निहारते हुए | gazing |
| एकटक | एकटक | steadily, without looking away |
| ठाढ़ा | खड़े रहे | stood |
2 धरि धीरजु पद बंदि बहोरी। बिनय सप्रेम करत कर जोरी।।
English explanation
Then, regaining composure and bowing at Bharata’s feet, he made a loving, humble address with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरि | धारण करके | gathering |
| धीरजु | धैर्य | composure |
| पद | भरत के चरणों को | Bharata’s feet |
| बंदि | प्रणाम करके | having bowed to |
| बहोरी | फिर | then, again |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble address |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | with affection |
| करत | करते हैं | makes |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | folding together |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.195
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 505
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 505, 505
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