अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामसखहि मिलि भरत सप्रेमा। पूँछी कुसल सुमंगल खेमा।।
मूल पाठ
रामसखहि मिलि भरत सप्रेमा। पूँछी कुसल सुमंगल खेमा।।
देखि भरत कर सील सनेहू। भा निषाद तेहि समय बिदेहू।।
स्रोत अभिलेख 2.195 · पुस्तक पृ. 505, 505
भावार्थ
मूल पाठ के बादरामसखा निषादराजसे प्रेमके साथ मिलकर भरतजीने कुशल, मङ्गल और क्षेम पूछी। भरतजीका शील और प्रेम देखकर निषाद उस समय विदेह हो गया (प्रेममुग्ध होकर देहकी सुध भूल गया)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 505 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रामसखहि मिलि भरत सप्रेमा। पूँछी कुसल सुमंगल खेमा।।
English explanation
Bharata met Rama’s friend, the Nishada chief, with affection and asked about his well-being, welfare, and safety.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामसखहि | राम के मित्र निषादराज से | with Rama’s friend, the Nishada chief |
| मिलि | मिलकर | having met |
| भरत | राम के भाई भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| सप्रेमा | प्रेमपूर्वक | with affection |
| पूँछी | पूछी | asked about |
| कुसल | कुशलता | well-being |
| सुमंगल | शुभ-मंगल | good welfare |
| खेमा | क्षेम और सुरक्षा | safety and ease |
2 देखि भरत कर सील सनेहू। भा निषाद तेहि समय बिदेहू।।
English explanation
Seeing Bharata’s gentle character and affection, the Nishada chief lost awareness of his body at that moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| भरत | भरत | Bharata |
| कर | का | of |
| सील | शील और विनम्र स्वभाव | gentle, virtuous character |
| सनेहू | स्नेह | affection |
| भा | हो गए | became |
| निषाद | निषादराज गुह | Guha, the Nishada chief |
| तेहि | उस | that |
| समय | समय | moment |
| बिदेहू | देह की सुध से रहित | unaware of his body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.195
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 505
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 505, 505
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।