अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नहिं अचिरजु जुग जुग चलि आई। केहि न दीन्हि रघुबीर बड़ाई।।
मूल पाठ
नहिं अचिरजु जुग जुग चलि आई। केहि न दीन्हि रघुबीर बड़ाई।।
राम नाम महिमा सुर कहहीं। सुनि सुनि अवधलोग सुखु लहहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.195 · पुस्तक पृ. 505, 505
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसमें कोई आश्चर्य नहीं है, युग-युगान्तरसे यही रीति चली आ रही है। श्रीरघुनाथजीने किसको बड़ाई नहीं दी? इस प्रकार देवता रामनामकी महिमा कह रहे हैं और उसे सुन-सुनकर अयोध्याके लोग सुख पा रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 505 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नहिं अचिरजु जुग जुग चलि आई। केहि न दीन्हि रघुबीर बड़ाई।।
English explanation
This is no surprise; it has been so through the ages. Whom has Rama not granted honor?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं | not |
| अचिरजु | आश्चर्य | a surprise |
| जुग | युग | age |
| जुग | युग; प्रत्येक युग में | age; through every age |
| चलि | चलती | continuing |
| आई | आई है | has come down |
| केहि | किसे | to whom |
| न | नहीं | not |
| दीन्हि | दी | gave |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम ने | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| बड़ाई | सम्मान और गौरव | honor and distinction |
2 राम नाम महिमा सुर कहहीं। सुनि सुनि अवधलोग सुखु लहहीं।।
English explanation
The gods recount the glory of Rama’s name; hearing it repeatedly, the people of Ayodhya find joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम का | of Rama |
| नाम | नाम | name |
| महिमा | महिमा | glory |
| सुर | देवता | the gods |
| कहहीं | कहते हैं | recount |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सुनि | बार-बार सुनकर | hearing repeatedly |
| अवधलोग | अयोध्या के लोग | the people of Ayodhya |
| सुखु | सुख | joy |
| लहहीं | पाते हैं | obtain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.195
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 505
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 505, 505
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।