अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुसल मूल पद पंकज पेखी। मैं तिहुँ काल कुसल निज लेखी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे प्रभो! कुशलके मूल आपके चरणकमलोंके दर्शन कर मैंने तीनों कालोंमें अपना कुशल जान लिया। अब आपके परम अनुग्रहसे करोड़ों कुलों (पीढिय़ों)-सहित मेरा मङ्गल (कल्याण) हो गया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 505 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कुसल मूल पद पंकज पेखी। मैं तिहुँ काल कुसल निज लेखी।।
अब प्रभु परम अनुग्रह तोरें। सहित कोटि कुल मंगल मोरें।।
स्रोत अभिलेख 2.195 · पुस्तक पृ. 505, 505
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कुसल मूल पद पंकज पेखी। मैं तिहुँ काल कुसल निज लेखी।।
English explanation
Seeing your lotus feet, the source of well-being, I consider myself blessed with welfare in past, present, and future.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुसल | कुशलता का | of well-being |
| मूल | मूल स्रोत | root source |
| पद | आपके चरण | your feet |
| पंकज | कमल; कमल-समान | lotus; lotus-like |
| पेखी | देखकर | having seen |
| मैं | मैंने | I |
| तिहुँ | तीनों | all three |
| काल | कालों में | times: past, present, and future |
| कुसल | कुशलता | well-being |
| निज | अपनी | my own |
| लेखी | मानी है | have reckoned |
2 अब प्रभु परम अनुग्रह तोरें। सहित कोटि कुल मंगल मोरें।।
English explanation
Now, my lord, through your supreme kindness, there is welfare for me together with countless family lines.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| प्रभु | हे स्वामी भरत | my lord Bharata |
| परम | अत्यंत महान | supreme |
| अनुग्रह | कृपा से | through kindness |
| तोरें | आपकी | your |
| सहित | साथ सहित | together with |
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| कुल | कुलों के | family lines |
| मंगल | मंगल और कल्याण | welfare and good fortune |
| मोरें | मेरे लिए | for me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.195
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 505
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 505, 505
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।