अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकइ न बोलि बिकल नरनाहू। सोक जनित उर दारुन दाहू।।
मूल पाठ
सकइ न बोलि बिकल नरनाहू। सोक जनित उर दारुन दाहू।।
नाइ सीसु पद अति अनुरागा। उठि रघुबीर बिदा तब मागा।।
स्रोत अभिलेख 2.77 · पुस्तक पृ. 407, 407
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा व्याकुल हैं, बोल नहीं सकते। हृदयमें शोकसे उत्पन्न हुआ भयानक सन्ताप है। तब रघुकुलके वीर श्रीरामचन्द्रजीने अत्यन्त प्रेमसे चरणोंमें सिर नवाकर उठकर विदा माँगी—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 407 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सकइ न बोलि बिकल नरनाहू। सोक जनित उर दारुन दाहू।।
English explanation
AI draft: The distraught king cannot speak; his heart burns fiercely with grief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकइ | सकते हैं | can |
| न | नहीं | not |
| बोलि | बोल | speak |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| नरनाहू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सोक | शोक | grief |
| जनित | से उत्पन्न | arising from |
| उर | हृदय में | in the heart |
| दारुन | भयंकर | fierce |
| दाहू | जलन | burning anguish |
2 नाइ सीसु पद अति अनुरागा। उठि रघुबीर बिदा तब मागा।।
English explanation
Bowing his head at his father's feet with deep affection, Rama rose and then asked leave to depart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| सीसु | सिर | head |
| पद | चरणों में | at the feet |
| अति | अत्यंत | deeply |
| अनुरागा | प्रेम से | with affection |
| उठि | उठकर | having risen |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu's lineage |
| बिदा | विदा की अनुमति | leave to depart |
| तब | तब | then |
| मागा | माँगी | asked for |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.77
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 407
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 407, 407
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।