अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लोकहुँ बेद बिदित कबि कहहीं। राम बिमुख थलु नरक न लहहीं।।
मूल पाठ
लोकहुँ बेद बिदित कबि कहहीं। राम बिमुख थलु नरक न लहहीं।।
यहु संसउ सब के मन माहीं। राम गवनु बिधि अवध कि नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.252 · पुस्तक पृ. 553, 554
भावार्थ
मूल पाठ के बादलोक और वेदमें प्रसिद्ध है और कवि (ज्ञानी) भी कहते हैं कि जो श्रीरामजीसे विमुख हैं उन्हें नरकमें भी ठौर नहीं मिलती। सबके मनमें यह सन्देह हो रहा था कि हे विधाता! श्रीरामचन्द्रजीका अयोध्या जाना होगा या नहीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 554 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लोकहुँ बेद बिदित कबि कहहीं। राम बिमुख थलु नरक न लहहीं।।
English explanation
It is known in worldly tradition and the Vedas, and poets say that those turned away from Rama find no place even in hell.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोकहुँ | लोक में भी | in worldly tradition too |
| बेद | वेदों में | in the Vedas |
| बिदित | प्रसिद्ध; जाना हुआ | well known |
| कबि | कवि | poets |
| कहहीं | कहते हैं | say |
| राम | राम से | from Rama |
| बिमुख | विमुख लोग | those turned away |
| थलु | स्थान | a place |
| नरक | नरक में | in hell |
| न | नहीं | not |
| लहहीं | पाते हैं | obtain |
2 यहु संसउ सब के मन माहीं। राम गवनु बिधि अवध कि नाहीं।।
English explanation
Everyone wonders whether fate will allow Rama to return to Ayodhya or not.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यहु | यह | this |
| संसउ | संशय | doubt |
| सब | सब | everyone |
| के | के | of |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | in |
| राम | राम का | Rama's |
| गवनु | जाना; लौटना | going; returning |
| बिधि | विधाता; भाग्य | the ordainer; fate |
| अवध | अयोध्या को | to Ayodhya |
| कि | या | or |
| नाहीं | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.252
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 554
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 553, 554
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।