अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखि सिय सहित सरल दोउ भाई। कुटिल रानि पछितानि अघाई।।
मूल पाठ
लखि सिय सहित सरल दोउ भाई। कुटिल रानि पछितानि अघाई।।
अवनि जमहि जाचति कैकेई। महि न बीचु बिधि मीचु न देई।।
स्रोत अभिलेख 2.252 · पुस्तक पृ. 553, 554
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजीसमेत दोनों भाइयों (श्रीराम-लक्ष्मण) को सरल स्वभाव देखकर कुटिल रानी कैकेयी भरपेट पछतायी। वह पृथ्वी तथा यमराजसे याचना करती है, किन्तु धरती बीच (फटकर समा जानेके लिये रास्ता) नहीं देती और विधाता मौत नहीं देता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 554 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लखि सिय सहित सरल दोउ भाई। कुटिल रानि पछितानि अघाई।।
English explanation
Seeing the guilelessness of both brothers together with Sita, the scheming queen Kaikeyi deeply regretted her conduct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखि | देखकर | seeing |
| सिय | सीता | Sita |
| सहित | के साथ | together with |
| सरल | सरल; निष्कपट | guileless |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई—राम और लक्ष्मण | brothers—Rama and Lakshmana |
| कुटिल | कुटिल | scheming |
| रानि | रानी कैकेयी | Queen Kaikeyi |
| पछितानि | पछताईं | regretted |
| अघाई | बहुत अधिक | deeply; exceedingly |
2 अवनि जमहि जाचति कैकेई। महि न बीचु बिधि मीचु न देई।।
English explanation
Kaikeyi begs the earth for a place to disappear into and Yama for death; but the earth grants no opening, and fate grants no death.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवनि | पृथ्वी से | from the earth |
| जमहि | यम से | from Yama, the god of death |
| जाचति | माँगती हैं | begs |
| कैकेई | कैकेयी, राम की सौतेली माता | Kaikeyi, Rama's stepmother |
| महि | पृथ्वी | the earth |
| न | नहीं | not |
| बीचु | स्थान; समाने की जगह | space; an opening to sink into |
| बिधि | विधाता | the ordainer of fate |
| मीचु | मृत्यु | death |
| न | नहीं | not |
| देई | देते हैं | grants |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.252
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 554
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 553, 554
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।