अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखा न मरमु राम बिनु काहूँ। माया सब सिय माया माहूँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीके सिवा इस भेदको और किसीने नहीं जाना। सब मायाएँ [पराशक्ति महामाया] श्रीसीताजीकी मायामें ही हैं। सीताजीने सासुओंको सेवासे वशमें कर लिया। उन्होंने सुख पाकर सीख और आशीर्वाद दिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 554 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लखा न मरमु राम बिनु काहूँ। माया सब सिय माया माहूँ।।
सीयँ सासु सेवा बस कीन्हीं। तिन्ह लहि सुख सिख आसिष दीन्हीं।।
स्रोत अभिलेख 2.252 · पुस्तक पृ. 553, 554
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लखा न मरमु राम बिनु काहूँ। माया सब सिय माया माहूँ।।
English explanation
No one except Rama understood this mystery; all maya lies within Sita's maya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखा | जाना; समझा | understood |
| न | नहीं | not |
| मरमु | रहस्य | the mystery |
| राम | राम | Rama |
| बिनु | के बिना; के सिवा | except |
| काहूँ | किसी ने | by anyone |
| माया | माया; रूप-प्रपंच की शक्ति | maya; power of manifest appearance |
| सब | सारी | all |
| सिय | सीता की | Sita's |
| माया | माया; अद्भुत रूप धारण करने की शक्ति | maya; power of wondrous manifestation |
| माहूँ | के भीतर | within |
2 सीयँ सासु सेवा बस कीन्हीं। तिन्ह लहि सुख सिख आसिष दीन्हीं।।
English explanation
Through her service, Sita won her mothers-in-law's hearts. Pleased, they gave her guidance and blessings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीयँ | सीता ने | Sita, as the agent |
| सासु | सासों को | her mothers-in-law |
| सेवा | सेवा से | through service |
| बस | वश में; स्नेह से जीता हुआ | won over |
| कीन्हीं | कर लिया | made; brought |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| लहि | पाकर | having received |
| सुख | सुख | happiness |
| सिख | सीख; हितकारी सलाह | guidance |
| आसिष | आशीर्वाद | blessings |
| दीन्हीं | दिए | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.252
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 554
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 553, 554
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।