अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुर जन नारि मगन अति प्रीती। बासर जाहिं पलक सम बीती।।
मूल पाठ
पुर जन नारि मगन अति प्रीती। बासर जाहिं पलक सम बीती।।
सीय सासु प्रति बेष बनाई। सादर करइ सरिस सेवकाई।।
स्रोत अभिलेख 2.252 · पुस्तक पृ. 553, 554
भावार्थ
मूल पाठ के बादअयोध्यापुरीके पुरुष और स्त्री सभी प्रेममें अत्यन्त मग्र हो रहे हैं। उनके दिन पलके समान बीत जाते हैं। जितनी सासुएँ थीं, उतने ही वेष (रूप) बनाकर सीताजी सब सासुओंकी आदरपूर्वक एक-सी सेवा करती हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 553 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुर जन नारि मगन अति प्रीती। बासर जाहिं पलक सम बीती।।
English explanation
AI-draft interpretation: The city's men and women are deeply absorbed in love; days pass like the blink of an eye.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर के | of the city |
| जन | पुरुष; नगरवासी | men; townspeople |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| मगन | मग्न | absorbed |
| अति | अत्यंत | deeply |
| प्रीती | प्रेम में | in love |
| बासर | दिन | days |
| जाहिं | चले जाते हैं | pass away |
| पलक | पलक झपकना | a blink |
| सम | के समान | like |
| बीती | बीतकर | having elapsed |
2 सीय सासु प्रति बेष बनाई। सादर करइ सरिस सेवकाई।।
English explanation
Taking a separate form for each mother-in-law, Sita respectfully serves them all equally.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता | Sita, Rama's wife |
| सासु | सास | mother-in-law |
| प्रति | प्रत्येक के लिए | for each |
| बेष | रूप | form |
| बनाई | बनाकर | having assumed |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| करइ | करती हैं | performs |
| सरिस | समान रूप से | equally |
| सेवकाई | सेवा | service |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.252
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 553
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 553, 554
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।