अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लै रघुनाथहि ठाउँ देखावा। कहेउ राम सब भाँति सुहावा।।
मूल पाठ
लै रघुनाथहि ठाउँ देखावा। कहेउ राम सब भाँति सुहावा।।
पुरजन करि जोहारु घर आए। रघुबर संध्या करन सिधाए।।
स्रोत अभिलेख 2.89 · पुस्तक पृ. 417, 417
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसने श्रीरघुनाथजीको ले जाकर वह स्थान दिखाया। श्रीरामचन्द्रजीने [देखकर] कहा कि यह सब प्रकारसे सुन्दर है। पुरवासी लोग जोहार (वन्दना) करके अपने-अपने घर लौटे और श्रीरामचन्द्रजी सन्ध्या करने पधारे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 417 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लै रघुनाथहि ठाउँ देखावा। कहेउ राम सब भाँति सुहावा।।
English explanation
Guha took Rama and showed him the spot. Rama said, ‘It is pleasant in every way.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लै | ले जाकर | taking him along |
| रघुनाथहि | रघुकुल के स्वामी राम को | to Rama, lord of the Raghu lineage |
| ठाउँ | स्थान | place |
| देखावा | दिखाया | showed |
| कहेउ | कहा | said |
| राम | राम ने | Rama |
| सब | सभी | every |
| भाँति | प्रकार से | in respect |
| सुहावा | सुहावना है | is pleasant |
2 पुरजन करि जोहारु घर आए। रघुबर संध्या करन सिधाए।।
English explanation
The townspeople paid their respects and returned home. Rama went to perform his twilight prayers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरजन | नगर के लोग | townspeople |
| करि | करके | having made |
| जोहारु | प्रणाम | respectful salutations |
| घर | घर | home |
| आए | लौट आए | returned |
| रघुबर | रघुकुल के श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of the Raghu lineage |
| संध्या | संध्या-वंदन | twilight prayers |
| करन | करने | to perform |
| सिधाए | चले गए | went |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 417
- सहायक विषय
- श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 417, 417
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।