अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुहँ सँवारि साँथरी डसाई। कुस किसलयमय मृदुल सुहाई।।
मूल पाठ
गुहँ सँवारि साँथरी डसाई। कुस किसलयमय मृदुल सुहाई।।
सुचि फल मूल मधुर मृदु जानी। दोना भरि भरि राखेसि पानी।।
स्रोत अभिलेख 2.89 · पुस्तक पृ. 417, 417
भावार्थ
मूल पाठ के बादगुहने [इसी बीच] कुश और कोमल पत्तोंकी कोमल और सुन्दर साथरी सजाकर बिछा दी; और पवित्र, मीठे और कोमल देख-देखकर दोनोंमें भर-भरकर फल-मूल और पानी रख दिया [अथवा अपने हाथसे फल-मूल दोनोंमें भर-भरकर रख दिये]॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 417 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गुहँ सँवारि साँथरी डसाई। कुस किसलयमय मृदुल सुहाई।।
English explanation
Guha prepared and spread a soft, lovely bed made of kusha grass and tender leaves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुहँ | गुह ने | Guha, the Nishada chief |
| सँवारि | सँवारकर | having arranged carefully |
| साँथरी | बिछौना | bedding |
| डसाई | बिछाया | spread out |
| कुस | कुश घास | kusha grass |
| किसलयमय | कोमल पत्तों से बना | made of tender leaves |
| मृदुल | मुलायम | soft |
| सुहाई | सुंदर, सुखद | lovely and comfortable |
2 सुचि फल मूल मधुर मृदु जानी। दोना भरि भरि राखेसि पानी।।
English explanation
Selecting clean, sweet, tender fruits and roots, Guha filled leaf bowls and set them out, along with water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुचि | स्वच्छ, शुद्ध | clean, pure |
| फल | फल | fruits |
| मूल | खाने योग्य जड़ें | edible roots |
| मधुर | मीठे | sweet |
| मृदु | कोमल | tender |
| जानी | जानकर, चुनकर | recognizing and selecting |
| दोना | पत्तों के कटोरे | leaf bowls |
| भरि | भरकर | filling |
| भरि | भरकर | each fully |
| राखेसि | उसने रख दिया | he set out |
| पानी | पानी भी | water as well |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 417
- सहायक विषय
- श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 417, 417
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