अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लेत सोच भरि छिनु छिनु छाती। जनु जरि पंख परेउ संपाती।।
मूल पाठ
लेत सोच भरि छिनु छिनु छाती। जनु जरि पंख परेउ संपाती।।
राम राम कह राम सनेही। पुनि कह राम लखन बैदेही।।
स्रोत अभिलेख 2.148 · पुस्तक पृ. 466, 467
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा क्षण-क्षणमें सोचसे छाती भर लेते हैं। ऐसी विकल दशा है मानो [गीधराज जटायुका भाई] सम्पाती पंखोंके जल जानेपर गिर पड़ा हो। राजा [बार-बार] 'राम, राम, 'हा स्नेही (प्यारे) राम! कहते हैं, फिर 'हा राम, हा लक्ष्मण, हा जानकी ऐसा कहने लगते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 467 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लेत सोच भरि छिनु छिनु छाती। जनु जरि पंख परेउ संपाती।।
English explanation
Moment after moment he sighed with his chest full of grief, like Sampati fallen after his wings were burnt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लेत | लेते थे | kept taking |
| सोच | शोक से | with grief |
| भरि | भरकर | filling |
| छिनु | क्षण | moment |
| छिनु | क्षण | after moment |
| छाती | छाती | the chest |
| जनु | मानो | as though |
| जरि | जल जाने पर | having burnt |
| पंख | पंख | wings |
| परेउ | गिर पड़ा | fell |
| संपाती | जटायु का भाई गृध्र संपाती | Sampati, the vulture and Jatayu's brother |
2 राम राम कह राम सनेही। पुनि कह राम लखन बैदेही।।
English explanation
The king, devoted to Rama, says “Rama, Rama,” and then “Rama, Lakshmana, Sita.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | हे राम | O Rama |
| राम | हे राम | O Rama |
| कह | कहते हैं | says |
| राम | राम के | of Rama |
| सनेही | प्रेमी राजा | the loving king |
| पुनि | फिर | then |
| कह | कहते हैं | says |
| राम | हे राम | O Rama |
| लखन | हे लक्ष्मण | O Lakshmana |
| बैदेही | हे सीता, विदेह की राजकुमारी | O Sita, princess of Videha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.148
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 467
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 466, 467
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