अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आसन सयन बिभूषन हीना। परेउ भूमितल निपट मलीना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजा आसन, शय्या और आभूषणोंसे रहित बिलकुल मलिन (उदास) पृथ्वीपर पड़े हुए हैं। वे लंबी साँसें लेकर इस प्रकार सोच करते हैं मानो राजा ययाति स्वर्गसे गिरकर सोच कर रहे हों॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 467 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आसन सयन बिभूषन हीना। परेउ भूमितल निपट मलीना।।
लेइ उसासु सोच एहि भाँती। सुरपुर तें जनु खँसेउ जजाती।।
स्रोत अभिलेख 2.148 · पुस्तक पृ. 466, 467
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आसन सयन बिभूषन हीना। परेउ भूमितल निपट मलीना।।
English explanation
Without seat, bed, or ornaments, the king lay on the ground, utterly forlorn.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आसन | आसन | seat |
| सयन | शय्या | bed |
| बिभूषन | आभूषण | ornaments |
| हीना | से रहित | without |
| परेउ | पड़े थे | lay fallen |
| भूमितल | भूमि पर | on the ground |
| निपट | अत्यंत | utterly |
| मलीना | मलिन और उदास | wan and forlorn |
2 लेइ उसासु सोच एहि भाँती। सुरपुर तें जनु खँसेउ जजाती।।
English explanation
He sighed in grief as though Yayati had fallen from heaven.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लेइ | लेते हैं | takes |
| उसासु | उसास | a sigh |
| सोच | शोक में | in grief |
| एहि | इस | this |
| भाँती | प्रकार | manner |
| सुरपुर | स्वर्ग से | heaven |
| तें | से | from |
| जनु | मानो | as though |
| खँसेउ | गिर पड़े | fell |
| जजाती | राजा ययाति | King Yayati |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.148
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 467
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 466, 467
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।