अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लिए सनेह बिकल उर लाई। गै मनि मनहुँ फनिक फिरि पाई।।
मूल पाठ
लिए सनेह बिकल उर लाई। गै मनि मनहुँ फनिक फिरि पाई।।
रामहि चितइ रहेउ नरनाहू। चला बिलोचन बारि प्रबाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.44 · पुस्तक पृ. 380, 380
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्नेहसे विकल राजाने रामजीको हृदयसे लगा लिया। मानो साँपने अपनी खोयी हुई मणि फिर पा ली हो। राजा दशरथजी श्रीरामजीको देखते ही रह गये। उनके नेत्रोंसे आँसुओंकी धारा बह चली॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 380 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लिए सनेह बिकल उर लाई। गै मनि मनहुँ फनिक फिरि पाई।।
English explanation
Overwhelmed with love, the king clasped Rama to his breast, as though a serpent had recovered its lost jewel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लिए | ले लिया | took into his embrace |
| सनेह | प्रेम से | with love |
| बिकल | व्याकुल | overwhelmed |
| उर | हृदय से | to his breast |
| लाई | लगाकर | clasping |
| गै | खो गई हुई | lost |
| मनि | मणि | jewel |
| मनहुँ | मानो | as though |
| फनिक | साँप ने | a serpent |
| फिरि | फिर से | again |
| पाई | पा ली | recovered |
2 रामहि चितइ रहेउ नरनाहू। चला बिलोचन बारि प्रबाहू।।
English explanation
The king kept gazing at Rama, and a stream of tears began flowing from his eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | at Rama |
| चितइ | देखते हुए | gazing |
| रहेउ | रहे | continued |
| नरनाहू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| चला | बह चला | began flowing |
| बिलोचन | आँखों से | from the eyes |
| बारि | जल; आँसू | water; tears |
| प्रबाहू | प्रवाह; धारा | a stream |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 380
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 380, 380
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।