अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लालन जोगु लखन लघु लोने। भे न भाइ अस अहहिं न होने।।
मूल पाठ
लालन जोगु लखन लघु लोने। भे न भाइ अस अहहिं न होने।।
पुरजन प्रिय पितु मातु दुलारे। सिय रघुबरहि प्रानपिआरे।।
स्रोत अभिलेख 2.2 · पुस्तक पृ. 509, 510
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरे छोटे भाई लक्ष्मण बहुत ही सुन्दर और प्यार करनेयोग्य हैं। ऐसे भाई न तो किसीके हुए, न हैं, न होनेके ही हैं। जो लक्ष्मण अवधके लोगोंको प्यारे, माता-पिताके दुलारे और श्रीसीतारामजीके प्राणप्यारे हैं;॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 509 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लालन जोगु लखन लघु लोने। भे न भाइ अस अहहिं न होने।।
English explanation
Lakshmana is young, handsome, and worthy of tender care. No such brother has existed before, exists now, or will exist hereafter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लालन | लाड़-प्यार से पालन | tender nurturing |
| जोगु | योग्य | worthy of |
| लखन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| लघु | छोटे; कम उम्र के | young; younger |
| लोने | सुंदर, सलोने | handsome, charming |
| भे | हुए | have existed |
| न | नहीं | not |
| भाइ | भाई | brother |
| अस | ऐसे | such |
| अहहिं | हैं | exist now |
| न | नहीं | not |
| होने | भविष्य में होंगे | will exist hereafter |
2 पुरजन प्रिय पितु मातु दुलारे। सिय रघुबरहि प्रानपिआरे।।
English explanation
He is beloved by the townspeople, cherished by his parents, and as dear as life to Sita and Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरजन | नगरवासी | townspeople |
| प्रिय | प्रिय | beloved |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| दुलारे | लाड़ले | cherished child |
| सिय | सीता को | to Sita |
| रघुबरहि | रघुकुलश्रेष्ठ राम को | to Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| प्रानपिआरे | प्राणों के समान प्यारे | as dear as life |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 509
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 509, 510
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।