अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मृदु मूरति सुकुमार सुभाऊ। तात बाउ तन लाग न काऊ।।
मूल पाठ
मृदु मूरति सुकुमार सुभाऊ। तात बाउ तन लाग न काऊ।।
ते बन सहहिं बिपति सब भाँती। निदरे कोटि कुलिस एहिं छाती।।
स्रोत अभिलेख 2.2 · पुस्तक पृ. 509, 510
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनकी कोमल मूॢत और सुकुमार स्वभाव है, जिनके शरीरमें कभी गरम हवा भी नहीं लगी, वे वनमें सब प्रकारकी विपत्तियाँ सह रहे हैं। [हाय!] इस मेरी छातीने [कठोरतामें] करोड़ों वज्रोंका भी निरादर कर दिया [नहीं तो यह कभीकी फट गयी होती]॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 509 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मृदु मूरति सुकुमार सुभाऊ। तात बाउ तन लाग न काऊ।।
English explanation
His form is tender and his nature delicate. Dear one, not even a harsh wind has ever touched his body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मृदु | कोमल | tender |
| मूरति | शरीर; रूप | body; form |
| सुकुमार | सुकुमार; नाजुक | delicate |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| तात | हे तात; प्रिय संबोधन | dear one |
| बाउ | हवा; यहाँ कठोर हवा | wind; here, harsh wind |
| तन | शरीर को | his body |
| लाग | लगी | touched |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी | ever |
2 ते बन सहहिं बिपति सब भाँती। निदरे कोटि कुलिस एहिं छाती।।
English explanation
He endures every kind of hardship in the forest; this heart of mine puts the hardness of millions of thunderbolts to shame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे लक्ष्मण | he, Lakshmana |
| बन | वन में | in the forest |
| सहहिं | सहते हैं | endures |
| बिपति | विपत्ति; कष्ट | hardship |
| सब | सब | every |
| भाँती | प्रकार की | kind of |
| निदरे | तुच्छ किए; कठोरता में पीछे छोड़ा | put to shame; surpassed in hardness |
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| कुलिस | वज्र | thunderbolts |
| एहिं | इस | this |
| छाती | छाती ने; हृदय ने | breast; heart |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 509
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 509, 510
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।