अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखी महीप कराल कठोरा। सत्य कि जीवनु लेइहि मोरा।।
मूल पाठ
लखी महीप कराल कठोरा। सत्य कि जीवनु लेइहि मोरा।।
बोले राउ कठिन करि छाती। बानी सबिनय तासु सोहाती।।
स्रोत अभिलेख 2.31 · पुस्तक पृ. 369, 370
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने देखा कि यह (तलवार) बड़ी ही भयानक और कठोर है [और सोचा—] क्या सत्य ही यह मेरा जीवन लेगी? राजा अपनी छाती कड़ी करके, बहुत ही नम्रताके साथ उसे(कैकेयीको)प्रिय लगनेवाली वाणी बोले—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 369 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लखी महीप कराल कठोरा। सत्य कि जीवनु लेइहि मोरा।।
English explanation
The king saw her as terrifying and unyielding and thought, 'Will she truly take my life?'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखी | देखा | saw |
| महीप | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| कराल | भयावह | terrifying |
| कठोरा | कठोर | unyielding |
| सत्य | सचमुच | truly |
| कि | क्या | whether |
| जीवनु | प्राण | life |
| लेइहि | ले लेगी | will take |
| मोरा | मेरे | my |
2 बोले राउ कठिन करि छाती। बानी सबिनय तासु सोहाती।।
English explanation
Steeling his heart, the king spoke humbly in words that would please Kaikeyi.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | बोले | spoke |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कठिन | दृढ़ | firm |
| करि | करके | making |
| छाती | हृदय | his heart |
| बानी | वाणी | words |
| सबिनय | विनम्र | humble |
| तासु | उसे, कैकेयी को | to her, Kaikeyi |
| सोहाती | अच्छी लगने वाली | pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 369
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 369, 370
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।