अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रिया बचन कस कहसि कुभाँती। भीर प्रतीति प्रीति करि हाँती।।
मूल पाठ
प्रिया बचन कस कहसि कुभाँती। भीर प्रतीति प्रीति करि हाँती।।
मोरें भरतु रामु दुइ आँखी। सत्य कहउँ करि संकरू साखी।।
स्रोत अभिलेख 2.31 · पुस्तक पृ. 369, 370
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे प्रिये! हे भीरु! विश्वास और प्रेमको नष्ट करके ऐसे बुरी तरहके वचन कैसे कह रही हो। मेरे तो भरत और रामचन्द्र दो आँखें (अर्थात् एक-से) हैं; यह मैं शङ्करजीकी साक्षी देकर सत्य कहता हूँ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 369 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रिया बचन कस कहसि कुभाँती। भीर प्रतीति प्रीति करि हाँती।।
English explanation
Beloved, why do you speak such improper words, destroying all our trust and love?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रिया | हे प्रिये | beloved |
| बचन | वचन | words |
| कस | क्यों | why |
| कहसि | तुम कहती हो | you speak |
| कुभाँती | बुरे ढंग से | in an improper manner |
| भीर | समूह, संचित राशि | the whole accumulation |
| प्रतीति | विश्वास | trust |
| प्रीति | प्रेम | love |
| करि | करके | having caused |
| हाँती | नाश | destruction |
2 मोरें भरतु रामु दुइ आँखी। सत्य कहउँ करि संकरू साखी।।
English explanation
For me, Bharata and Rama are my two eyes; with Shiva as my witness, I speak the truth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोरें | मेरे लिए | for me |
| भरतु | भरत, दशरथ के पुत्र | Bharata, Dasharatha's son |
| रामु | राम, दशरथ के पुत्र | Rama, Dasharatha's son |
| दुइ | दो | two |
| आँखी | आँखें | eyes |
| सत्य | सत्य | the truth |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| करि | बनाकर | making |
| संकरू | शंकर, भगवान शिव को | Shiva |
| साखी | साक्षी | a witness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 369
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 369, 370
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।