अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवसि दूतु मैं पठइब प्राता। ऐहहिं बेगि सुनत दोउ भ्राता।।
मूल पाठ
अवसि दूतु मैं पठइब प्राता। ऐहहिं बेगि सुनत दोउ भ्राता।।
सुदिन सोधि सबु साजु सजाई। देउँ भरत कहुँ राजु बजाई।।
स्रोत अभिलेख 2.31 · पुस्तक पृ. 369, 370
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं अवश्य सबेरे ही दूत भेजूँगा। दोनों भाई (भरत-शत्रुघ्न) सुनते ही तुरंत आ जायँगे। अच्छा दिन (शुभ मुहूत्र्त) शोधवाकर, सब तैयारी करके डंका बजाकर मैं भरतको राज्य दे दूँगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 370 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अवसि दूतु मैं पठइब प्राता। ऐहहिं बेगि सुनत दोउ भ्राता।।
English explanation
I will certainly send a messenger in the morning; on hearing the message, both brothers, Bharata and Shatrughna, will come quickly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवसि | अवश्य | certainly |
| दूतु | संदेशवाहक | a messenger |
| मैं | मैं | I |
| पठइब | भेजूँगा | will send |
| प्राता | प्रातःकाल | in the morning |
| ऐहहिं | आ जाएँगे | will come |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्राता | भाई, भरत और शत्रुघ्न | brothers, Bharata and Shatrughna |
2 सुदिन सोधि सबु साजु सजाई। देउँ भरत कहुँ राजु बजाई।।
English explanation
After finding an auspicious day and making all the preparations, I will publicly proclaim Bharata's installation as king.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुदिन | शुभ दिन | an auspicious day |
| सोधि | खोजकर, निश्चित करके | finding and determining |
| सबु | सारी | all |
| साजु | आवश्यक सामग्री | the required arrangements |
| सजाई | तैयार करके | having prepared |
| देउँ | मैं दूँगा | I will give |
| भरत | भरत | Bharata, Dasharatha's son |
| कहुँ | को | to |
| राजु | राज्य | the kingdom |
| बजाई | खुले रूप से घोषणा करके | with public proclamation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 370
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 369, 370
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।