अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखी नरेस बात फुरि साँची। तिय मिस मीचु सीस पर नाची।।
मूल पाठ
लखी नरेस बात फुरि साँची। तिय मिस मीचु सीस पर नाची।।
गहि पद बिनय कीन्ह बैठारी। जनि दिनकर कुल होसि कुठारी।।
स्रोत अभिलेख 2.34 · पुस्तक पृ. 372, 372
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने समझ लिया कि बात सचमुच (वास्तवमें) सच्ची है, स्त्रीके बहाने मेरी मृत्यु ही सिरपर नाच रही है। [तदनन्तर राजाने कैकेयीके] चरण पकड़कर उसे बिठाकर विनती की कि तू सूर्यकुल- [रूपी वृक्ष] के लिये कुल्हाड़ी मत बन॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 372 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लखी नरेस बात फुरि साँची। तिय मिस मीचु सीस पर नाची।।
English explanation
The king realized that the matter was indeed true: death, in the guise of his wife, was dancing over his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखी | समझी | recognized |
| नरेस | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| बात | बात | the matter |
| फुरि | सचमुच | indeed |
| साँची | सत्य | true |
| तिय | पत्नी के | of his wife |
| मिस | रूप में | in the guise |
| मीचु | मृत्यु | death |
| सीस | सिर | head |
| पर | पर | over |
| नाची | नाच रही थी | was dancing |
2 गहि पद बिनय कीन्ह बैठारी। जनि दिनकर कुल होसि कुठारी।।
English explanation
The king clasped her feet, pleaded with her, and seated her: ‘Do not become an axe to the solar dynasty.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहि | पकड़कर | clasping |
| पद | पैर | feet |
| बिनय | विनती | a plea |
| कीन्ह | की | made |
| बैठारी | उसे बैठाया | seated her |
| जनि | मत | do not |
| दिनकर | सूर्य का | of the sun |
| कुल | वंश | dynasty |
| होसि | तुम बनो | become |
| कुठारी | कुल्हाड़ी | an axe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 372
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 372, 372
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।