अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मागु माथ अबहीं देउँ तोही। राम बिरहँ जनि मारसि मोही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतू मेरा मस्तक माँग ले, मैं तुझे अभी दे दूँ। पर रामके विरहमें मुझे मत मार। जिस किसी प्रकारसे हो तू रामको रख ले। नहीं तो जन्मभर तेरी छाती जलेगी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 372 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मागु माथ अबहीं देउँ तोही। राम बिरहँ जनि मारसि मोही।।
राखु राम कहुँ जेहि तेहि भाँती। नाहिं त जरिहि जनम भरि छाती।।
स्रोत अभिलेख 2.34 · पुस्तक पृ. 372, 372
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मागु माथ अबहीं देउँ तोही। राम बिरहँ जनि मारसि मोही।।
English explanation
‘Ask for my head; I will give it to you this very moment. Do not kill me through separation from Rama.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागु | माँग लो | ask for |
| माथ | मेरा सिर | my head |
| अबहीं | अभी ही | this very moment |
| देउँ | मैं दे दूँ | I will give |
| तोही | तुम्हें | to you |
| राम | राम से | from Rama |
| बिरहँ | वियोग से | through separation |
| जनि | मत | do not |
| मारसि | तुम मारो | kill |
| मोही | मुझे | me |
2 राखु राम कहुँ जेहि तेहि भाँती। नाहिं त जरिहि जनम भरि छाती।।
English explanation
‘Let Rama remain here by whatever means possible; otherwise my heart will burn throughout my life.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राखु | रहने दो | let remain |
| राम | राम को | Rama |
| कहुँ | को | object marker |
| जेहि | जिस भी | whichever |
| तेहि | उस | that |
| भाँती | रीति से | way |
| नाहिं | नहीं | not |
| त | तो | then |
| जरिहि | जलेगी | will burn |
| जनम | जीवन | life |
| भरि | भर | throughout |
| छाती | छाती | heart |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 372
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 372, 372
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।