अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखि सनेह कातरि महतारी। बचनु न आव बिकल भइ भारी।।
मूल पाठ
लखि सनेह कातरि महतारी। बचनु न आव बिकल भइ भारी।।
राम प्रबोधु कीन्ह बिधि नाना। समउ सनेहु न जाइ बखाना।।
स्रोत अभिलेख 2.69 · पुस्तक पृ. 400, 401
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह देखकर कि माता स्नेहके मारे अधीर हो गयी हैं और इतनी अधिक व्याकुल हैं कि मुँहसे वचन नहीं निकलता, श्रीरामचन्द्रजीने अनेक प्रकारसे उन्हें समझाया। वह समय और स्नेह वर्णन नहीं किया जा सकता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 400 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लखि सनेह कातरि महतारी। बचनु न आव बिकल भइ भारी।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Seeing this, the mother became overcome with affection; she could not speak and grew deeply distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखि | देखकर | seeing |
| सनेह | स्नेह से | with affection |
| कातरि | कातर हुई | became overwhelmed |
| महतारी | माता कौसल्या | Mother Kaushalya |
| बचनु | वचन | words |
| न | नहीं | not |
| आव | निकलता था | would come out |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| भइ | हो गईं | became |
| भारी | अत्यंत | deeply |
2 राम प्रबोधु कीन्ह बिधि नाना। समउ सनेहु न जाइ बखाना।।
English explanation
Rama consoled his mother in many ways. The affection at that moment cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने | Rama |
| प्रबोधु | समझाना और सांत्वना देना | reassurance and consolation |
| कीन्ह | किया | gave |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| नाना | अनेक | many |
| समउ | उस समय का | of that moment |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| बखाना | वर्णन किया | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.69
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 400
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 400, 401
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।