अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखन लखेउ भा अनरथ आजू। एहिं सनेह बस करब अकाजू।।
मूल पाठ
लखन लखेउ भा अनरथ आजू। एहिं सनेह बस करब अकाजू।।
मागत बिदा सभय सकुचाहीं। जाइ संग बिधि कहिहि कि नाही।।
स्रोत अभिलेख 2.73 · पुस्तक पृ. 403, 404
भावार्थ
मूल पाठ के बादलक्ष्मणने देखा कि आज (अब) अनर्थ हुआ। ये स्नेहवश काम बिगाड़ देंगी! इसलिये वे विदा माँगते हुए डरके मारे सकुचाते हैं [और मन-ही-मन सोचते हैं] कि हे विधाता! माता साथ जानेको कहेंगी या नहीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 404 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लखन लखेउ भा अनरथ आजू। एहिं सनेह बस करब अकाजू।।
English explanation
Lakshmana thought, “Disaster has struck today; overcome by affection, she will thwart my purpose.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| लखेउ | समझा; भाँपा | perceived; thought |
| भा | हो गया | has occurred |
| अनरथ | अनर्थ; विपत्ति | disaster; misfortune |
| आजू | आज | today |
| एहिं | यह माता | she, his mother |
| सनेह | स्नेह के | of affection |
| बस | वश में होकर | under the sway |
| करब | करेंगी | will bring about |
| अकाजू | काम में बाधा; काम बिगाड़ना | thwarting his purpose |
2 मागत बिदा सभय सकुचाहीं। जाइ संग बिधि कहिहि कि नाही।।
English explanation
Lakshmana hesitated fearfully while asking leave, wondering whether fate would grant him permission to accompany them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागत | माँगते समय | while asking for |
| बिदा | जाने की अनुमति | leave to depart |
| सभय | भय सहित | fearfully |
| सकुचाहीं | संकोच करते हैं | hesitates |
| जाइ | जाओ | go |
| संग | साथ | along with them |
| बिधि | विधाता; भाग्य | Providence; fate |
| कहिहि | कहेगा | will say |
| कि | या | or |
| नाही | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 404
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 403, 404
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।